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अवलोकन की संकल्पना स्पष्ट कीजिए तथा इसके विभिन्न प्रकारों को संक्षेप में बताइए।

या

अवलोकन से आप क्या समझते हैं? अवलोकन के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख कीजिए।

या

“विज्ञान अवलोकन से आरंभ होता है और अपनी अंतिम वैधता के लिए इसे अवलोकन पर ही लौटना होता है।” इस कथन की विवेचना कीजिए।

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वैज्ञानिक अध्ययन में तथ्यों के संकलन के लिए अपनाई जाने वाली विभिन्न पद्धतियों में अवलोकन का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसे सामाजिक तथा प्राकृतिक दोनों प्रकार के विज्ञानों में समान रूप से अपनाया जाता है। इसीलिए यह एक सार्वभौम पद्धति मानी जाती है। वास्तव में, प्रत्येक विज्ञान को प्रारंभ अवलोकन द्वारा होता है तथा अंत में सत्यापन का परीक्षण भी अवलोकन द्वारा ही होता है। अवलोकन को एक प्राचीन तथा अति आधुनिक अनुसंधान पद्धति कंहा गया है। अवलोकन में अधिकांशतः ज्ञानेंद्रियों तथा मुख्य रूप से आँखों द्वारा ज्ञान प्राप्त किया जाता है। यह अत्यंत विश्वसनीय पद्धति मानी जाती है। इसीलिए इसका प्रयोग सर्वाधिक होता है।

अवलोकने का अर्थ एवं परिभाषाएँ
‘अवलोकन’ का शाब्दिक अर्थ ‘देखना’ है। इसे ‘निरीक्षण’ भी कहते हैं। ‘अवलोकन’, ‘निरीक्षण अथवा ‘प्रेक्षण’ को सभी प्रकार के विज्ञानों में महत्त्वपूर्ण स्थान है; क्योंकि हम सभी प्रकार की समस्याओं एवं घटनाओं को आँखों से देखकर पहचान सकते हैं। इस प्रकार अवलोकन किसी अध्ययन-वस्तु को निष्पक्ष भाव से देखने की वह प्रणाली है, जिसके द्वारा अनुसंधानकर्ता अध्ययन-वस्तु के संबंध में कुछ ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करता है।

प्रमुख विद्वानों ने अवलोकन की परिभाषाएँ निम्न प्रकार दी हैं-
ऑक्सफोर्ड कंसाइज डिक्शनरी’ (Oxford Concise Dictionary)
 में अवलोकन को इन शब्दों में परिभाषित किया गया है-“अवलोकन का अर्थ है घटनाओं को, जैसे कि वे प्रकृति में होती हैं, कार्य तथा कारण अथवा परस्पर संबंध की दृष्टि से यथातथ्य देखना और नोट करना।’
मोजर (Moser) के अनुसार-“अवलोकनको सुंदर ढंग से वैज्ञानिक जाँच-पड़ताल की पद्धति कहा जा सकता है। ठोस अर्थों में अवलोकन में कानों तथा वाणी की अपेक्षा आँखों का प्रयोग होता है।”
यंग (Young) के अनुसार—अवलोकन आँखों के द्वारा किया गया विचारपूर्ण अध्ययन है, जिसका प्रयोग सामूहिक व्यवहार तथा जटिल सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ संपूर्णता का निर्माण करने वाली पृथक्-पृथक् इकाइयों का सूक्ष्म निरीक्षण करने की एक पद्धति के रूप में किया जा सकता है।”

अवलोकन की प्रमुख विशेषताएँ
अवलोकन की संकल्पना को इसकी निम्नलिखित विशेषताओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-

⦁    मानव-इंद्रियों, विशेष रूप से आँखों का प्रयोग–अवलोकन में मानव इंद्रियों का; विशेष रूप से आँखों का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इसे ‘आँखों द्वारा देखने की एक कला’ कहा गया है, जिससे अध्ययन-वस्तु से सम्बन्धित प्राथमिक सामग्री का संचय किया जाता है। मोजर ने ठीक ही कहा है कि “ठोस अर्थ में अवलोकन में कानों और वाणी की अपेक्षा आँखों का अधिक प्रयोग होता है।”
⦁    मूलभूत वैज्ञानिक पद्धति–अवलोकन को एक मूलभूत वैज्ञानिक पद्धति माना गया है; क्योंकि – यह प्रत्येक विषय (चाहे वह प्राकृतिक विज्ञान है अथवा सामाजिक विज्ञान) में सामान्य रूप से प्रयोग की जाती है। इस प्रविधि के द्वारा विश्वसनीय सूचनाएँ एकत्रित की जा सकती हैं।
⦁    अध्ययन-वस्तु का प्रत्यक्ष निरीक्षण–अवलोकन एक वैज्ञानिक पद्धति है, जिसमें अध्ययन-वस्तु का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जा सकता है। यह एक ऐसी पद्धति है जिसमें अनुसंधानकर्ता अपनी सभी इंद्रियों का प्रयोग करके अध्ययन-वस्तु से संबंधित तथ्यों की प्रत्यक्ष रूप से खोज करता है।
⦁    उद्देश्यपूर्ण अध्ययन–अवलोकन पद्धति इसलिए भी वैज्ञानिक मानी जाती है क्योंकि यह उद्देश्यपूर्ण अध्ययनों में सहायक है। इसके द्वारा अनुसंधानकर्ता अपनी सभी इंद्रियों का प्रयोग केवल उन्हीं घटनाओं के अवलोकन के लिए करता है, जो अध्ययन की समस्या के अनुकूल हैं।
⦁     गहन अध्ययन–अवलोकन केवल उद्देश्यपूर्ण अध्ययन करने में ही सहायक नहीं है, अपितु गहन अध्ययन करने में भी सहायक है। यह सामाजिक मानवशास्त्र तथा मानवशास्त्र जैसे विषयों में एकमात्र ऐसी प्रविधि है, जो विश्वसनीय सूचनाओं को गहन रूप से संकलित करने में सहायक है। समाजशास्त्र में भी इसका प्रयोग एक पूर्ण अथवा पूरक प्रविधि के रूप में बढ़ता जा रहा है।
⦁    कार्य-कारण संबंधों की व्याख्या-अवलोकन द्वारा विभिन्न घटनाओं में पाए जाने वाले कार्य-कारण संबंधों की व्याख्या की जा सकती है। प्राकृतिक विज्ञानों में यह कार्य-कारण संबंधों की व्याख्या करने की एकमात्र पद्धति है। समाजशास्त्र में भी इसका प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
⦁    विश्वसनीयता–अवलोकन द्वारा एकत्रित सूचनाएँ अधिक विश्वसनीय होती हैं। इसमें क्योंकि अनुसंधानकर्ता स्वयं देखकर अध्ययन करता है, इसलिए वस्तुनिष्ठ एवं विश्वसनीय सूचनाएँ ही संकलित होती हैं। इसमें किसी घटना एवं समस्या का अध्ययन उसी रूप में किया जाता है, जिस रूप में वह विद्यमान होती है।
⦁    सामूहिक व्यवहार का अध्ययन–अवलोकन सामूहिक व्यवहार का अध्ययन करने में भी सहायक है। क्योंकि इसमें अवलोकनकर्ता सरलता से अवलोकित समूह के सदस्यों से घुल-मिल जाता है, इसलिए वह बिना अपना उद्देश्य बताए समूह के सदस्यों के सामूहिक व्यवहार का अध्ययन कर सकता है।

अवलोकन के प्रमुख प्रकार
सामाजिक अनुसंधान में अवलोकन का प्रयोग विविध रूपों में किया जाता है। प्रमुख रूप से अवलोकन को निम्नलिखित प्रकारों में बाँटा जा सकता है-

1. अनियंत्रित अथवा साधारण अवलोकन-जब अनुसंधानकर्ता किन्हीं प्राकृतिक अवस्थाओं का अध्ययन करने हेतु कुछ क्रियाओं का निरीक्षण करता है तो वह अपने निरीक्षण कार्य में पूर्ण स्वतंत होता है। उसके इस कार्य में किसी बाह्य शक्ति या आंतरिक भावना का कोई प्रभाव दृष्टिगोचर नहीं होता। इस प्रकार की स्वतंत्र निरीक्षण विधि में अनुंसधानकर्ता का आंतरिक या बाह्य किसी भी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं होता, इसलिए इस अवलोकन को समाजशास्त्रियों ने अनियंत्रित अवलोकन की संज्ञा दी है। इस प्रकार के अवलोकन से अनुसंधानकर्ता अध्ययन-वस्तु से संबंधित संपूर्ण ज्ञान को प्राप्त कर लेता है। इसलिए गुड एवं हैट (Goode and Hatt) का कहना है, “व्यक्तियों के पास सामाजिक संबंधों के बारे में जो कुछ भी ज्ञान है,वह अनियंत्रित निरीक्षण के द्वारा ही प्राप्त हुआ है। इसी प्रकार पी०वी० यंग (PV. Young) ने लिखा है, “अनियंत्रित अवलोकनों में जीवन की वास्तविक दशाओं की सावधानीपूर्वक परीक्षा की जाती है तथा अवलोकित घटना की यथार्थता की जाँच करने अथवा यथार्थता के परीक्षण-हेतु यंत्रों के प्रयोग करने का कोई प्रयत्न नहीं किया जाता।” इस प्रकार, अनियंत्रित अवलोकन में घटना का वास्तविक रूप में अध्ययन किया जाता है तथा उस घटना पर अथवा अवलोकतनकर्ता पर किसी प्रकार का नियंत्रण रखने का प्रयास नहीं किया जाता। अनियंत्रित अवलोकन के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
⦁    सहभागी अवलोकन-इस प्रकार के अवलोकन में अनुसंधानकर्ता उस समूह में जाकर बस जाती है जिसका वह अध्ययन करता है। अनुसंधानकर्ता समूह की सभी क्रियाओं में सक्रिय भाग लेता है और अपने आपको समूह के सदस्य के रूप में स्वीकार होने योग्य बना देता है। इस प्रकार सहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता अध्ययन किए जाने वाले समूह के लोगों से घुल-मिलकर समूह की गतिविधियों व समस्या का अध्ययन करता है। किन्तु इस संबंध में अनुसंधानकर्ता को काफी सतर्क रहना पड़ता है ताकि किसी भी स्तर पर समूह के सदस्यों को उस पर किसी प्रकार की शंका न होने पाए, अन्यथा समूह के सदस्यों के व्यवहार में औपचारिकता एवं कृत्रिमता आ जाएगी और अनुसंधानकर्ता अपने उदृदेश्य की पूर्ति करने में असफल रहेगा।
⦁    असहभागी अवलोकन-इस प्रकार के अवलोकन में अनुसंधानकर्ता अध्ययन किए जाने वाले समूह का सदस्य नहीं बनता और न वह उस समूह की क्रियाओं में कोई भाग ही लेता है। वह दूर से ही समूह की क्रियाओं का अध्ययन करता है और साथ-ही-साथ समूह के सदस्यों को अपना परिचय देकर यह भी बतला देता है कि उसका उद्देश्य समूह की क्रियाओं का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष भाव से अध्ययन करना है। इस प्रकार असहभागी अवलोकन, सहभागी अवलोकन का विपरीत रूप है।
⦁    अर्द्ध-सहभागी अवलोकन-इस प्रकार के अवलोकन में अनुसंधानकर्ता समुदाय के कुछ कार्यों में भाग लेकर और कुछ कार्यों में वह भाग न लेकर समूह का तटस्थ रूप से अध्ययन करता है। इस प्रकार कुछ सीमा तक अनुसंधानकर्ता सहभागी अवलोकन द्वारा समुदाय का अध्ययन करता है। यह सहभागी तथा असहभागी अवलोकन दोनों का मिश्रित रूप है तथा वास्तव में अधिक, उपयोगी है।

2. नियंत्रित अथवा व्यवस्थित अवलोकन-इस प्रकार के अवलोकन में अनुसंधानकर्ता पर अनेक नियंत्रण लगे रहते हैं। यह नियंत्रण अनेक प्रविधियों के रूप में लगा होता है। दूसरे शब्दों में, नियंत्रित अवलोकन के अंतर्गत अनुसंधानकर्ता को अवलोकन कार्यों में अनेक सीमाओं का ध्यान रखना पड़ता है। ये सीमाएँ सामाजिक घटनाओं के लिए और साथ-ही-साथ अनुसंधानकर्ता के लिए लगाई जाती हैं। क्योंकि सामाजिक घटनाओं में घटना पर नियंत्रण रखना कठिन है, इसलिए अधिकांशतया अनुसंधानकर्ता को स्वयं पर ही नियंत्रण रखना पड़ता है। अनुसंधानकर्ता को अवलोकन करने की योजनाओं को बनाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त अपनी डायरी में अवलोकित तथ्यों को लिखना पड़ता है या उन्हें टेपरिकॉर्डर द्वारा रिकॉर्ड करना पड़ता। है। इस प्रकार नियंत्रित अवलोकन में अवलोकनकर्ता को निश्चित सिद्धांतों की सीमाओं में रहकर ही अवलोकन का कार्य करना पड़ता है।

3. सामूहिक अवलोकन-इस प्रकार के अवलोकन में एक ही समस्या का अवलोकन कई अनुसंधानकर्ता एक साथ सामूहिक रूप से करते हैं। ये अनुसंधानकर्ता सामाजिक घटना के विभिन्न पक्षों के विशेषज्ञ होते हैं। अवलोकन करने के उपरांत ये सब अनुसंधानकर्ता विचार-विमर्श करके समस्या से संबंधित उपकल्पना निर्माण करते हैं। इस प्रकार के अवलोकन | में व्यक्तिगत पक्षपात होने तथा किसी पक्ष के छूट जाने की संभावना पूर्णतया समाप्त हो जाती है।

निष्कर्ष–उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट हो जाता है कि अवलोकन एक ऐसी प्रविधि है,जिसमें अनुसंधानकर्ता अपनी आँखों से देखकर किसी समस्या का विचारपूर्वक अध्ययन करता है। इस प्रकार का अवलोकन अनियंत्रित, नियंत्रित तथा सामूहिक हो सकता है। जब अनुसंधानकर्ता समस्या से संबंधित समुदाय का सदस्य बनकर समुदाय के कार्य में सक्रिय भाग लेता है तो वह सहभागी अवलोकन कहलाता है और जब वह समुदाय के कार्य में भाग न लेकर दूर से ही समुदाय को अध्ययन करता है तो वह असहभागी अवलोकन कहलाता है। कभी-कभी अनुसंधानकर्ता कुछ कार्यों में भाग लेकर और कुछ दूर से ही देखकर समस्या का अध्ययन करता है। ऐसी स्थिति को समाजशास्त्रियों ने अर्द्ध-सहभागी अवलोकन कहा है। सभी प्रकार के अवलोकन समुदाय और उसकी समस्याओं का पूर्ण ज्ञान प्रदान करने में सहायक होते हैं, इसलिए कहा गया है, जो कुछ भी किसी समस्या का हमें ज्ञान है, वह अवलोकन का ही प्रतिफल है।”

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