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सहभागी अवलोकन की संकल्पना स्पष्ट कीजिए।

या

सहभागी तथा असहभागी अवलोकन में अन्तर बताइए।

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सामाजिक अनुसंधान में जिन पद्धतियों द्वारा आँकड़ों को संकलन किया जाता है, उनमें अवलोकन का प्रमुख स्थान है। यह सर्वाधिक प्रचलित पद्धति है, जिसमें आँखों का अधिकतर प्रयोग किया जाता है। सहभागी तथा असहभागी अवलोकन इसके प्रमुख प्रकार हैं।

सहभागी अवलोकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ
सहभागी अवलोकन में अवलोकनकर्ता अध्ययन की जाने वाली परिस्थितियों में स्वयं भाग लेता है और इस समूह का औपचारिक सदस्य बन जाता है। समूह में पूर्ण रूप से घुल-मिलकर तथा सभी क्रिया-कलापों में भाग लेकर अपना उद्देश्य प्रकट किए बिना वह समूह के सदस्यों का अवलोकन करता है। सहभागी अवलोकन का प्रयोग तब किया जाता है जबकि अनुसंधानकर्ता उस समूह में स्वयं घुल-मिल जाता है जिसका कि वह अध्ययन करना चाहता है। प्रमुख विद्वानों ने इसे निम्न प्रकार परिभाषित किया है–

सोजर एवं कैल्टन (Moser and Kalton) के अनुसार—“इस विधि द्वारा अवलोकनकर्ता अध्ययन किए जाने वाले समूह अथवा संगठन के दैनिक जीवन में प्रवेश करता है।”
यंग (Young) के अनुसार–‘सहभागी अवलोकन में अवलोकनकर्ता किसी समूह की अस्थायी सदस्यता ग्रहण कर लेता है और समूह के सदस्यों के साथ मिलकर समूह के कार्यों में भाग लेता है, किंतु वह समूह के किसी भी सदस्य को यह आभास नहीं होने देता कि वह समूह का अध्ययन करने के उद्देश्य से समूह के कार्यों में समूह के सदस्य के साथ घुल-मिलकर भाग ले रहा है।”
गुड एवं हैट (Goode and Hatt) के अनुसार-“इस प्रविधि का प्रयोग तभी किया जा सकता है। जबकि अवलोकनकर्ता अपने उद्देश्य को प्रकट किए बिना उसी समूह का सदस्य मान लिया जाता है।” उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सहभागी अवलोकन में अवलोकनकर्ता उसी समूह का एक सदस्य बन जाता है जिसका कि उसे अवलोकन करना है। समूह में पूर्ण रूप से घुल-मिलकर तथा सभी क्रियाकलापों में भाग लेकर अपना उद्देश्य प्रकट किए बिना वह समूह के सदस्यों का अवलोकन करता है।

असहभागी अवलोकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ
असहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता समस्या से संबंधित समूह का न हो अस्थायी सदस्य बनता है। और न समूह के कार्यों में सक्रिय भाग लेता है, बल्कि वह दूर से ही एक तटस्थ निरीक्षणकर्ता के रूप में समस्याओं का अध्ययन करता है। इस अवलोकन में अवलोकनकर्ता अधिक गहराई तक पहुँचने का प्रयत्न नहीं करता। प्रमुख विद्वानों ने इसे इस प्रकारे परिभाषित किया

हैपी०एच० मन (PH, Mann) के अनुसार–‘असहभागी अवलोकन एक ऐसी विधि है जिसमें अवलोकन करने वाला अवलोकित से छिपा रहती है।” इस प्रकार असहभागी अवलोकन समूह के सदस्यों में सहभागिता किए बिना किया जाने वाला अवलोकन है। यह अवलोकन ही अधिकांश अध्ययनों में प्रयोग किया जाता है।

सहभागी तथा असहभागी अवलोकन में अंतर
सहभागी तथा असहभागी अवलोकन दो विपरीत प्रकार के अवलोकन हैं, जिनकी अपनी-अपनी उपयोगिताएँ तथा सीमाएँ हैं। दोनों में प्रमुख अंतर इस प्रकार से किया जा सकता है-

⦁    सहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता समूह का अस्थायी सदस्य होता है, किन्तु असहभागी अवलोकन मे अनुसंधानकर्ता समूह का सदस्य नहीं होता।
⦁    सहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता तटस्थ निरीक्षक के रूप में कार्य नहीं करता, परंतु असहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता तटस्थ दर्शक के रूप में समस्या का अध्ययन करता है।
⦁    सहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता एक प्रकार से परिचित व्यक्ति होता है, जबकि असहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता एक अपरिचित व्यक्ति होता है।
⦁    सहभागी अवलोकन के अंतर्गत अनुसंधानकर्ता स्वयं समूह का सदस्य रहता है, अतएव उसको अधिक समय तथा अधिक धन व्यय करना पड़ता है, जबकि असहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता समूह की अस्थायी सदस्यता ग्रहण नहीं करता, अतएव उसके अनुसंधान कार्य करने में समय तथा धन कम लगता है।
⦁    सहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता प्राप्त सूचनाओं की सत्यता की जाँच कर सकता है, परंतु असहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता प्राप्त सूचनाओं की सत्यता की जाँच नहीं कर सकता।
⦁    सहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता समूह का अस्थायी सदस्य होता है, जबकि असहभागी अवलोकन में अनुसंधानकर्ता समूह का. सदस्य न होने के कारण एक अपरिचित तथा प्रतिष्ठित व्यक्ति होता है।

निष्कर्ष–उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाता है कि सहभागी एवं असहभागी अनुसंधान में प्रयोग किए जाने वाले दो भिन्न प्रकार के अवलोकन हैं। प्रथम में अनुसंधानकर्ता को अवलोकित समूह का अस्थायी सदस्य बनना पड़ता है। असहभागी अवलोकन में वह समूह में जाकर तटस्थ दर्शक के रूप में अवलोकन करता है।

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