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जलोढ़ मृदा कितने प्रकार की होती है? वर्णन करो।

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जलोढ़ मृदा में वर्षा की भिन्नता के कारण क्षार, बालू और चीका की मात्रा अलग-अलग होती है। इसी आधार पर इसको चार भागों में बांटा जा सकता है

  1. बांगर मृदा- यह प्राचीन जलोढ़ मृदा है। जहां ऐसी मृदा पाई जाती है वहां बाढ़ का पानी नहीं पहुंच पाता। इसमें बालू और चीका की मात्रा लगभग बराबर होती है। इसमें कहीं-कहीं कंकड़ और चूने की डलियां भी मिलती हैं।
  2. खादर मृदा- इसे नवीन जलोढ़ भी कहते हैं। इस प्रकार की मृदा के क्षेत्र नदियों के समीप पाए जाते हैं। इन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रति वर्ष पहुंच जाता है जिससे नई जलोढ़ का जमाव होता रहता है।
  3. डैल्टाई मृदा- इसे नवीनतम कछारी मृदा भी कहते हैं। यह नदियों के डेल्टाओं के आस-पास पाई जाती है। इसमें चीका की मात्रा अधिक होती है।
  4. तटवर्ती जलोढ़ मिट्टी- इस प्रकार की मृदा का निर्माण तटों के साथ समुद्री लहरों के निक्षेप से प्राप्त चूरे से होता है।

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