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वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे story in hindi

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मनुष्य है वही जो मनुष्य के लिए मरे!
सुजानपुर गाँव में भारी सूखा पड़ा था | गाँव के सभी पोखर तालाब और कुण्ड सूख गए | लोग त्राहि-त्राहि करने लगे | आसपास के गाँवों में पानी के पोखर तो थे परंतु वहां से पानी भर कर लाना टेढ़ी खीर थी, क्योंकि ऐसा जल स्त्रोत आठ मील से कम दूरी पर न था | पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण वहां कुआँ खोदना अत्यंत कठिन था |
गाँव के लोग दिन रात आकाश की ओर मुँह उठाए रहते | संभवतः वर्षा आ जाए | आज आए या कल आए | वे अपने सभी बर्तनों को आँगन में बिछाए रखते ताकि वर्षा होने पर भरे जा सके | भेड़-बकरियाँ प्यास के कारण मरने लगी | लोग आस्थावादी थे | उनका तरह-तरह का जादू टोनों और मत-मतांतरो में अटूट विश्वास था | किसी ने सुझाव दिया कि देवलपुर के श्मशान में एक अघोरी रहता है | वह हर मुसीबत का हल बताता है परंतु बताता केवल अमावस की रात को ही है | अतः तय हुआ कि दो प्रतिनिधि देवलपुर भेजे जाए | गाँव में से दो युवकों को तैयार किया जो थोड़े जागरूक थे | दोनों युवकों ने आकर बताया कि “बाबाजी का कहना है कि गाँव के पूर्व में रानी माँ के मंदिर के पास कुआँ खोदा जाए तो पानी की कमी नहीं रहेगी |” परंतु वहाँ की ज़मीन खोदना बड़ी मुश्किल बात थी |परंतु बाबाजी ने कहा कि “कोशिश करोंगे तो सदा-सदा का झंझट कट जाएगा | सर्वसम्मति से तय हुआ कि प्रत्येक घर के जवान लोग खुदाई के काम में जुटेंगे | खुदाई चल रही थी | कुदाली चलाना दूभर था | हर एक के मन में आस्था थी | विश्वास था और सबसे बढ़कर जीवित रहने की ललक थी | सब बुरी तरह थक चुके थे | किसी में आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी | सभी निराश होकर वापस अघोरी बाबा के पास वापस गए | अघोरी बाबा ने कहा कि जल देवता इस गाँव से रुष्ट हैं | उन्हें केवल बलि देकर मनाया जा सकता है | और सिर्फ नर बलि | सभी सोच में पड़ गए | आखिर बलि देगा कौन? सभी एक दूसरे को देखने लगे | कुछ क्षण ऐसे बीते मानो वहाँ कोई मुर्दों की सभा हो | कोई शांत, कोई मौन, कोई चिंतित तो कोई भयभीत था | तभी पंडित रामनाथ उठे | उन्होंने कहा, “भाइयों मरना तो सभी को है | फिर हमारी मृत्यु तो और निकट है | यूँ ही प्यास से मरने से बेहतर होगा कि औरों को जीवन देने के लिए मरा जाए | महर्षि दधीचि ने सहर्ष अपना जीवन देवराज इंद्र को सौंप दिया था ताकि उनकी अस्थियों से व्रज नामक अस्त्र बनाया जा सके और राक्षसों का संहार हो सके | मैं दधीचि जैसे महान तो नहीं परंतु स्वयं को गाँव के लिए बलिदान करना चाहता हूँ | जाओ बलि की तैयारी करो, में मानता हूँ कि मनुष्य वही है जो मनुष्य के लिए मरे |
बलि देना एक घोर अपराध है | बलि मनुष्य की तो दूर पशुओं की भी नहीं दी जानी चाहिए | परंतु उस काल में अंधविश्वास बहुत था | लोग नहीं माने | अतः पंडित रामनाथ की बलि कुएँ की जगत पर चढ़ा दी | दंतकथा है कि उसके बाद की गई खुदाई से कुएँ में जल आ गया था |

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